सट्की तुम्हारी तो ‘दगा’ दे दिया !

‘टपरा तलाशा ‘

 तलाश  पूरी  हुई 

देखा  तमाशा 

 तमाश  पूरी  हुई …

 अटकी  तुम्हारी  तो वफ़ा का वास्ता ;

सट्की तुम्हारी  तो  ‘दगा’   दे  दिया 

 हुआ  यूँ  कि  कभी  ‘ये’ दिया 

 और  कभी  ‘वो’ दे  दिया 

‘हग’ अंग्रेजी  में  था  तो  मुकम्मल  था 

 हिंदी  में  हुआ  तो  ‘बेजा ‘ दे  दिया 

‘गुजारा ‘ तो  बोले  जिंदगी  थी 

न  गुजरी  तो  ‘उम्र ‘ का  ‘फलसफा ‘ दे  दिया 

‘कागजों’ पे  उकेरा  तो  ‘लफ्ज’ कहलाये 

 जो  न  उकेरा  उन्हें तो  ‘मरहबा’ दे  दिया 

  एक  ‘दाद’ दी  तो  महिफिलें  रंगरेज  हो  गयीं 

 दुत्कारा  तो  ‘अँधेरा ‘ दे दिया!

Advertisements

10 thoughts on “सट्की तुम्हारी तो ‘दगा’ दे दिया !

  1. अगर मैं झूठ बोलूंगा तो गैरत मार डालेगी,
    अगर मैं सच बोलूंगा तो हुकुमत मार डालेगी।

    बहुत होशियार रहना है हिन्दू-मुस्लमां को,
    वरना लड़ाकर आपस में सियासत मार डालेगी।..

    Liked by 1 person

  2. bhai, this one is really awesome….. Yaar

    ‘गुजारा ‘ तो बोले जिंदगी थी

    न गुजरी तो ‘उम्र ‘ का ‘फलसफा ‘ दे दिया

    ‘कागजों’ पे उकेरा तो ‘लफ्ज’ कहलाये

    जो न उकेरा उन्हें तो ‘मरहबा’ दे दिया

    bahut khoob…. Really Wonderful

    Liked by 1 person

Would love to hear from you!

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s