गहरी सांस लेने से लाभ






यदि  आपने गहरी सांस लेने का महत्व भली प्रकार से समझ लिया है तो गहरी सांस लेने का अभ्यास करना भी बहुत सरल होगा क्योंकि आप इसके लिए पर्याप्त प्रेरणा पाकर प्रयास करेंगे I केवल कुछ समय तक चैतन्य होकर सजगता पूर्वक अपनी आदत को सुधारते रहने से आपकी स्वांस खूब गहरी हो जाती है और आपका सीना भी मजबूत हो जाता है I बहुत शीघ्र ही आप इन लाभों से अपने जीवन में एक रूपांतरण पावेंगे I

१. यथा संभव झुक कर न तो बैठें और न ही चलें I सीधा  तन कर चलें और सीधा ही बैठें I

२. प्रातः बिस्तर छोड़ने के पहले करीब दस मिनट तक खूब गहरे स्वांस भरें और छोड़ें I स्वांस लेने और छोड़ने में समय बराबर लगावें I प्रारम्भ में यह कुछ कठिन प्रतीत होगा किन्तु शीघ्र ही आप यह बहुत आसानी से कर पायेंगे  I

३. यदि आप दिन भर में कहीं भी पैदल चल कर जाते हैं तो एक बहुत ही उत्तम अभ्यास आप कर सकते हैं जिससे आपकी गहरी सांस लेने की आदत भी पद जायेगी और एक अच्छा व्यायाम भी हो जाएगा :
आप यह गिनें की कितने कदम चलने में आप स्वांस को अन्दर भर सकते हैं: माना की यह ४ कदम है I
आप यह भी गिनें की कितने कदम चलने पर आप स्वांस को छोड़ सकते हैं : माना की यह ६ कदम है I

इस प्रकार से ४ कदम चलने पर स्वांस को पूरा गहरा भरना तथा ६ कदम चलने पर पूरा छोड़ देना–यह क्रम आप निरंतर बनाए रखिये I

४. आप यह देखिये की प्राकृतिक तथा सहज रूप से आप कितने सेकंड में स्वांस को भरते हैं तथा छोड़ते हैं I आप इस मात्र को एक नोटबुक में दर्ज कर लें और नित्यप्रति दिनांक दाल कर इस संख्या को रिकॉर्ड करते रहें: बहुत शीघ्र ही आप पावेंगे की यह संख्या बढती जा रही है और आपकी क्षमताएं भी बढती जा रहीं हैं I बिंदु तीन में बताये हुए अभ्यास को भी आप एक नोटबुक की सहायता से अभिवार्धित कर सकते हैं और परिणामों को कई गुना बढ़ा सकते हैं I

५. यथा संभव नाक से स्वांस लेवें I प्रकृति ने नाक स्वांस लेने के लिए बनायी है न की मुंह I जो विद्यार्थी मुंह से सांस लेते हैं वे बहुत ही जल्द रोगी हो  जाते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो  जाती है I नासिका मार्ग न केवल लम्बा होता है अपितु वहाँ कुछ बाल भी होते हैं जिनमे बाह्य वायु की मलिनताएँ फंस जातीं हैं और स्वच्छा वायु ही भीतर प्रविष्ट होती है–मुंह से स्वांस लेने पर यह लाभ नहीं होता I


गहरी सांस लेने से अनगिनत लाभ होते हैं I उनमें से कुछ लाभ जो की विद्यार्थियों की क्षमताओं के अभिवर्धन के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण हैं :

१. गहरी स्वांस लेने से फेंफड़े मजबूत होते हैं I

२. आपके शरीर को अधिक ओषजन मिलती है, फलस्वरूप, आप अधिक स्वस्थ अनुभव करते हैं I 

३.  फेंफडों के मजबूत होने से आपकी कार्यक्षमता अनेक गुना बढ़ जाती है I 

४. आपके शरीर को अधिक ओषजन मिलती है और फलस्वरूप रक्त का शोधन पूर्ण रूप से होता है (रक्त के शोधन हेतु ओषजन का महत्त्व सर्व विदित है ) I 

५. रक्त का शोधन अधिक और ठीक ढंग से होने के फलस्वरूप आपके शरीर  से विजातीय तत्वों का निष्कासन ठीक ढंग से होता है I

६. शरीर से मल तथा विजातीय तत्त्व निकल जाने पर व्याधियां नहीं घेरतीं I

७. व्याधियों के न होने पर न  तो आपको नीम हकीमों के चक्कर लगाने होते हैं और ना ही आपको दवाइयों पर हज़ारों- लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं I 

७. गहरी सांस लेने से आपके पाचन संस्थान को पर्याप्त ओषजन मिलती है और आपके द्वारा लिए गए भोजन का पाचन बहुत भली भाँती  होता है I 

८. जिन विद्यार्थियों को रक्त के लाल कणों की कमी के कारण तथा हीमोग्लोबिन की कमी के कारण , चक्कर आना, काम करने में मन न लगना, साहस में कमी इत्यादि का सामना करना पड़ता है, उनकी ये सारी परेशानियां गहरी सांस लेने के अभ्यास से, बहुत थोड़े से समय में ही दूर हो जाती हैं I 

९. गहरी सांस लेने से आपकी जीवनी शक्ति बढती है क्योंकि आप प्रत्येक सांस के साथ न केवल अधिक ओषजन ग्रहण करते हैं अपितु अधिकाधिक मात्रा में प्राण ऊर्जा भी अपने शरीर के अवयवों को पहुंचाते हैं I 

१०. जीवनी शक्ति के बढ़ने से आपके चेहरे पर चमक बढती है और आपका साहस भी बढ़ता है I 


११. बहुत थोड़े समय में ही आपको खुल कर भूंक लगने लगेगी और आपकी शारीरिक कमजोरी दूर हो जावेगी I 

१२. मस्तिस्क, हमारे शरीर का सबसे महत्त्व पूर्ण भाग है और इसमें सर्वाधिक ओषजन खपती है ; गहरी सांस लेने से न्यूरोन्स(मस्तिष्क की कोशिकाएं ) न केवल अधिक मात्र में रक्त पाते हैं, बल्कि उस रक्त का स्तर भी अति उत्तम होता है–जिससे न केवल हमारी स्मृति उत्तम होती है बल्कि हमारी धारणा शक्ति भी बढती है  I

१३. यह विदित हो कि हमारे मस्तिस्क में लाखों की संख्या में कोशिकाएं(जिन्हें न्यूरोन्स कहते हैं ) होतीं हैं –इन कोशिकायों में ग्लायल कोशिकाएं , न्यूरोन्स के लिए रक्त ले जाने का काम करती हैं और न्यूरोन्स मुख्य कोशिकाएं होतीं हैं I हमारे न्यूरोन्स बहुत ही कम संख्या में प्रयुक्त होते हैं अतः इनकी सतत मृत्यु  होती रहती  है ; आप शायद आश्चर्य से भर जावें किन्तु यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि जितने समय में आपने यह आलेख पढ़ा है उतने समय में ही आपके मस्तिस्क से लगभग ३०० न्यूरोन्स मर गए हैं, कम हो गए हैं I 
चूंकि हमारे मस्तिस्क में कई लाख कोशिकाएं होतीं हैं और उनमे से बहुत कम प्रयोग में लायीं जातीं है अतः यह हानि हमें नित्य-प्रति विदित नहीं होती किन्तु जब हम तीस वर्षा कि अवस्था पार कर  लेते हैं तो यह हानि बहुत ही गंभीर रूप से हमारे सामने आती है (यदि हम ऐसा कुछ भी अपनी दिनचर्या में नहीं कर रहे होते हैं जो इस कोशिका मृत्यू को रोकने के लिए आवश्यक होता है तो, जैसे कि गहरी सांस लेना !) I  तब मस्तिस्कीय क्षमता में कमियाँ अपने पूरे बल से हम पर आघात करना प्रारंभ कर देतीं हैं और हमारे सीखने कि क्षमता बहुत तेजी से घटने लगती है I

यदि इस बात का विद्यार्थी जीवन में ही पूरा ध्यान रखा जाए और गहरी सांस लेने कि आदत दाल ली जाए(जिसे बमुश्किल पंद्रह से बीस दिन लगेंगे यदि आप लगन से अभ्यास करें तो )–तो आप ऐसी किसी स्थिति का सामना जीवन में नहीं करेंगे और अपने मस्तिस्क का पूरा पूरा उपयोग करने कि दिशा में प्रयास कर सकेंगे I



१४. किसी भी विषय को समझने के लिए ध्यान देना होता है I ध्यान देने के लिए सांस गहरी लेने और रोकने कि जरूरत होती है I मजबूत फेंफडों वाले व्यक्ति ना केवल गहरी सांस ले पाते हैं अपितु सांस को रोक भी सकते हैं अतः वे बड़े ध्यान से किसी भी विषय को समझ सकते हैं I बड़े बड़े वाक्यों को लिखने तथा समझाने; या कि बोलने तथा सुनने के लिए; गहन विषयों को समझने के लिए ; आपको गहरी सांस लेने कि जरूरत होती है I जिन व्यक्तियों का ध्यान बिना पूरा वाक्य पढ़े टूट जाता है, बिना पूरा कथन कहे टूट जाता है या कि बिना पूरा कथन लिखे टूट जाता है, वे कभी भी, अच्छे पाठक, अच्छे वक्ता, अच्छे लेखक नहीं बन सकते I संसार के सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्ति मजबूत फेंफडों वाले व्यक्ति हुए हैं  I गहरी सांस लेकर ही आप एक प्रखर विचारक और किसी विषय के विशेषज्ञ बन सकते हैं I
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